उस प्रवक्ता ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ''तेज प्रताप की शादी भी लालू परिवार के लिए एक तरह मुसीबत बन गई. अगर हैसियत के लिहाज़ से देखें
तो यह बेमेल शादी नहीं है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय
तेज प्रताप की पत्नी एश्वर्या के बाबा थे. वो कांग्रेस के बड़े नेता थे और
यह परिवार काफ़ी संपन्न रहा है. इस लिहाज से ये शादी बेमेल नहीं है.''
वो कहते हैं, ''अगर पढ़ाई के लिहाज़ से देखें तो ये शादी बेमेल ज़रूर लगती. तेजप्रताप कॉलेज ड्रॉप आउट हैं जबकि एश्वर्या ने एमबीए किया है. दूसरी बात यह है कि चंद्रिका राय लालू प्रसाद यादव के चेले रहे हैं. तेज प्रताप को बख़ूबी पता होगा कि शादी से पहले चंद्रिका राय की उनके घर में कितनी तवज्जो थी.''
''जब शादी हुई तो रिश्ते बदले. लेकिन तेज प्रताप ने बदले रिश्ते को स्वीकार नहीं किया. एश्वर्या के लिए तेजप्रताप हैसियत में कोई बड़े नहीं हैं जबकि चंद्रिका राय के लिए लालू की हैसियत ज़रूर बड़ी थी. तेजप्रताप लालू की हैसियत के आईने में एश्वर्या को नहीं देख सकते थे क्योंकि एश्वर्या बराबरी के व्यवहार से कम नहीं चाहती होंगी. दिक़्क़त यहीं हो रही है.''
हालांकि वो कहते हैं कि पूरे विवाद में राबड़ी देवी सबसे अहम भूमिका अदा कर रही हैं. लालू परिवार को जानने वाले लोगों का कहना है कि राबड़ी ने चीज़ों को संभाल कर रखा है नहीं तो तेज प्रताप का बागी तेवर और मुश्किल खड़ा कर सकता था.
पूरे विवाद में आरजेडी के शुभचिंतकों का कहना है कि अगर लालू जेल में ना होते तो सब कुछ नियंत्रण में होता. ये लोग लालू की कमी साफ़ तौर पर महसूस कर रहे हैं.
जहानाबाद से तेज प्रताप ने चंद्र प्रकाश को अपना उम्मीदवार बनाया है जबकि आरजेडी के आधिकारिक उम्मीदवार सुरेंद्र प्रसाद यादव हैं. सुरेंद्र प्रसाद यादव जहानाबाद से आरजेडी के पहले भी सांसद रह चुके हैं.
जहानाबाद के स्थानीय पत्रकार अश्विनी कुमार मानते हैं कि अगर चंद्र प्रकाश चुनाव में डटे रहे तो आरजेडी को नुक़सान हो सकता है. चंद्र प्रकाश भी जाति से यादव ही हैं और इनके बारे में कहा जाता है कि ये तेज़प्रताप के बहुत अच्छे दोस्त हैं. कहा जा रहा है कि तेज प्रताप यहां चुनाव प्रचार करने आएंगे.
चंद्र प्रकाश ने बीबीसी से कहा, ''जहानाबाद में लड़ाई स्थानीय और बाहरी की है. आरजेडी ने सुरेंद्र प्रसाद यादव को उम्मीदवार बनाया है लेकिन वो यहां के नहीं हैं. हमने टिकट को लेकर तेजस्वी जी से भी संपर्क करने कोशिश की थी लेकिन उनसे बात नहीं हुई. कोई बात नहीं बनी तब तेज प्रताप जी ने यह क़दम उठाया.''
बिहार में इस बात को हर कोई जानता है कि तेज प्रताप अपने बाग़ी तेवर के साथ पार्टी और परिवार में अलग-थलग पड़ गए हैं. तेज प्रताप ने पार्टी और परिवार के बाद पत्नी से भी विद्रोह कर लिया लेकिन यहां भी वो अकेले पड़ गए. आरजेडी के एक प्रवक्ता ने बताया कि राबड़ी देवी एश्वर्या को बहुत मानती हैं और तलाक़ के मामले में पूरा परिवार तेज प्रताप नहीं बल्कि एशवर्या के साथ खड़ा है.
1990 के दशक से लेकर 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव तक लालू प्रसाद का बिहार के चुनाव में प्रभावी दख़ल रहा है लेकिन 2019 के आम चुनाव में जब राष्ट्रीय जनता दल सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है तो लालू जेल में हैं. यह तेजस्वी के लिए भी इम्तिहान है लेकिन तेज प्रताप उनके लिए सबसे बड़ा सवाल बन गए हैं.
वो कहते हैं, ''अगर पढ़ाई के लिहाज़ से देखें तो ये शादी बेमेल ज़रूर लगती. तेजप्रताप कॉलेज ड्रॉप आउट हैं जबकि एश्वर्या ने एमबीए किया है. दूसरी बात यह है कि चंद्रिका राय लालू प्रसाद यादव के चेले रहे हैं. तेज प्रताप को बख़ूबी पता होगा कि शादी से पहले चंद्रिका राय की उनके घर में कितनी तवज्जो थी.''
''जब शादी हुई तो रिश्ते बदले. लेकिन तेज प्रताप ने बदले रिश्ते को स्वीकार नहीं किया. एश्वर्या के लिए तेजप्रताप हैसियत में कोई बड़े नहीं हैं जबकि चंद्रिका राय के लिए लालू की हैसियत ज़रूर बड़ी थी. तेजप्रताप लालू की हैसियत के आईने में एश्वर्या को नहीं देख सकते थे क्योंकि एश्वर्या बराबरी के व्यवहार से कम नहीं चाहती होंगी. दिक़्क़त यहीं हो रही है.''
हालांकि वो कहते हैं कि पूरे विवाद में राबड़ी देवी सबसे अहम भूमिका अदा कर रही हैं. लालू परिवार को जानने वाले लोगों का कहना है कि राबड़ी ने चीज़ों को संभाल कर रखा है नहीं तो तेज प्रताप का बागी तेवर और मुश्किल खड़ा कर सकता था.
पूरे विवाद में आरजेडी के शुभचिंतकों का कहना है कि अगर लालू जेल में ना होते तो सब कुछ नियंत्रण में होता. ये लोग लालू की कमी साफ़ तौर पर महसूस कर रहे हैं.
जहानाबाद से तेज प्रताप ने चंद्र प्रकाश को अपना उम्मीदवार बनाया है जबकि आरजेडी के आधिकारिक उम्मीदवार सुरेंद्र प्रसाद यादव हैं. सुरेंद्र प्रसाद यादव जहानाबाद से आरजेडी के पहले भी सांसद रह चुके हैं.
जहानाबाद के स्थानीय पत्रकार अश्विनी कुमार मानते हैं कि अगर चंद्र प्रकाश चुनाव में डटे रहे तो आरजेडी को नुक़सान हो सकता है. चंद्र प्रकाश भी जाति से यादव ही हैं और इनके बारे में कहा जाता है कि ये तेज़प्रताप के बहुत अच्छे दोस्त हैं. कहा जा रहा है कि तेज प्रताप यहां चुनाव प्रचार करने आएंगे.
चंद्र प्रकाश ने बीबीसी से कहा, ''जहानाबाद में लड़ाई स्थानीय और बाहरी की है. आरजेडी ने सुरेंद्र प्रसाद यादव को उम्मीदवार बनाया है लेकिन वो यहां के नहीं हैं. हमने टिकट को लेकर तेजस्वी जी से भी संपर्क करने कोशिश की थी लेकिन उनसे बात नहीं हुई. कोई बात नहीं बनी तब तेज प्रताप जी ने यह क़दम उठाया.''
बिहार में इस बात को हर कोई जानता है कि तेज प्रताप अपने बाग़ी तेवर के साथ पार्टी और परिवार में अलग-थलग पड़ गए हैं. तेज प्रताप ने पार्टी और परिवार के बाद पत्नी से भी विद्रोह कर लिया लेकिन यहां भी वो अकेले पड़ गए. आरजेडी के एक प्रवक्ता ने बताया कि राबड़ी देवी एश्वर्या को बहुत मानती हैं और तलाक़ के मामले में पूरा परिवार तेज प्रताप नहीं बल्कि एशवर्या के साथ खड़ा है.
1990 के दशक से लेकर 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव तक लालू प्रसाद का बिहार के चुनाव में प्रभावी दख़ल रहा है लेकिन 2019 के आम चुनाव में जब राष्ट्रीय जनता दल सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है तो लालू जेल में हैं. यह तेजस्वी के लिए भी इम्तिहान है लेकिन तेज प्रताप उनके लिए सबसे बड़ा सवाल बन गए हैं.
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